श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.7.79 
एत मत रथ - यात्रा सकले देखिल ।
प्रभुर चरित्रे भट्टेर चमत्कार हैल ॥79॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वल्लभ भट्ट ने रथोत्सव देखा। वे श्री चैतन्य महाप्रभु के गुणों को देखकर आश्चर्यचकित रह गए।
 
Thus Vallabha Bhatta witnessed the Rath Yatra festival. He was amazed by the character of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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