श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.7.78 
प्रभुर सौन्दर्य देखि आर प्रेमोदय ।
‘एई त’ साक्षात्कृष्ण’ भट्टेर हइल निश्चये ॥78॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की सुन्दरता और उनके परमानंद प्रेम के जागरण को देखकर, वल्लभ भट्ट ने निष्कर्ष निकाला, "यहाँ भगवान कृष्ण हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है।"
 
Seeing the beauty of Sri Chaitanya Mahaprabhu and the rise of his love, Vallabh Bhatta concluded, “Undoubtedly, this is Lord Krishna.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)