श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.7.75 
चौद्द मादल बाजे उच्च सङ्कीर्तन ।
एक एक नर्तकेर प्रेमे भासिल भुवन ॥75॥
 
 
अनुवाद
चौदह मृदंगों की ध्वनि से सामूहिक जयघोष गूंज रहा था और प्रत्येक समूह में एक नर्तक था जिसके आनंदमय प्रेम नृत्य ने सम्पूर्ण विश्व को अभिभूत कर दिया।
 
Fourteen drums resounded with loud chanting. Each group had a dancer, whose love-filled dance filled the entire universe.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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