श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 73-74
 
 
श्लोक  3.7.73-74 
अद्वैत, नित्यानन्द, हरिदास, वक्रेश्वर ।
श्रीवास, राघव, पण्डित - गदाधर ॥73॥
सात जन सात - ठाञि करेन नर्तन ।
‘हरि - बोल’ बलि’ प्रभु करेन भ्रमण ॥74॥
 
 
अनुवाद
सात भक्त - अद्वैत, नित्यानंद, हरिदास ठाकुर, वक्रेश्वर, श्रीवास ठाकुर, राघव पंडित और गदाधर पंडित - ने सात समूह बनाए और नृत्य करना शुरू कर दिया। श्री चैतन्य महाप्रभु "हरिबोल!" का जाप करते हुए एक समूह से दूसरे समूह में घूमते रहे।
 
Seven devotees—Advaita, Nityananda, Haridasa Thakura, Vakresvara, Srivasa Thakura, Raghava Pandita, and Gadadhara Pandita—formed seven groups and began dancing. Sri Chaitanya Mahaprabhu moved from group to group, chanting, "Hari Bol!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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