श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.7.7 
बहु - दिन मनोरथ तोमा’ देखिबारे ।
जगन्नाथ पूर्ण कैला, देखिलुँ तोमारे ॥7॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, "हे प्रभु, मैं बहुत दिनों से आपके दर्शन की इच्छा रखता था। अब भगवान जगन्नाथ ने मेरी यह इच्छा पूरी कर दी है; इसलिए मैं आपके दर्शन कर रहा हूँ।"
 
"O Lord, I have been wanting to see you for a long time. Now that Lord Jagannatha has fulfilled my wish, I am not seeing you."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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