| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट » श्लोक 65 |
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| | | | श्लोक 3.7.65  | अद्वैत, नित्यानन्द - राय - पार्श्वे दुइ - जन ।
मध्ये महाप्रभु वसिला, आगे - पाछे भक्त - गण ॥65॥ | | | | | | | अनुवाद | | श्री चैतन्य महाप्रभु भक्तों के बीच बैठे थे। अद्वैत आचार्य और भगवान नित्यानन्द, भगवान के एक ओर बैठे थे। अन्य भक्त भगवान के आगे और पीछे बैठे थे। | | | | Sri Chaitanya Mahaprabhu sat among all the devotees. Advaita Acharya and Nityananda Prabhu sat on either side of Mahaprabhu. Other devotees sat in front and behind Mahaprabhu. | | ✨ ai-generated | | |
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