श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  3.7.53 
भट्टेर हृदये दृढ़ अभिमान जा नि’ ।
भङ्गी करि’ महाप्रभु कहे एत वाणी ॥53॥
 
 
अनुवाद
यह जानते हुए कि वल्लभ भट्ट का हृदय अभिमान से भरा हुआ है, श्री चैतन्य महाप्रभु ने ये शब्द कहे, तथा संकेत किया कि भक्ति कैसे सीखी जा सकती है।
 
Knowing that Vallabha Bhatta had a proud heart, Sri Chaitanya Mahaprabhu said these words to show how one can learn about devotion.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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