श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.7.24 
ताते प्रेम - भक्ति - ‘पुरुषार्थ - शिरोमणि’ ।
राग - मार्गे प्रेम - भक्ति सर्वाधिक जानि ॥24॥
 
 
अनुवाद
“रामानंद राय की कृपा से, मैंने समझ लिया है कि कृष्ण का परमानंद प्रेम जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है और कृष्ण का सहज प्रेम सर्वोच्च पूर्णता है।
 
By the grace of Ramanand Rai, I have been able to understand that love of Krishna is the highest goal of life and passionate love of Krishna is the highest perfection.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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