श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.7.21 
षड् - दर्शन - वेत्ता भट्टाचार्य - सार्वभौम ।
षड् - दर्शने जगद्गुरु भागवतोत्तम ॥21॥
 
 
अनुवाद
"सार्वभौम भट्टाचार्य छह दार्शनिक सिद्धांतों के पूर्ण ज्ञाता हैं। इसलिए वे छह दर्शन मार्गों की शिक्षा देने वाले समस्त जगत के गुरु हैं। वे भक्तों में सर्वश्रेष्ठ हैं।"
 
Sarvabhauma Bhattacharya is a master of the six philosophical schools. Therefore, he is the Jagadguru in teaching the six paths of philosophy. He is the best among devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)