श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.7.19 
याँहार कृपाते म्लेच्छेर हय कृष्ण - भक्ति ।
के कहिते पारे ताँर वैष्णवता - शक्ति? ॥19॥
 
 
अनुवाद
"वे इतने महान व्यक्तित्व हैं कि अपनी कृपा से वे मांसाहारी [म्लेच्छों] को भी कृष्ण की भक्ति में परिवर्तित कर सकते हैं। अतः, उनके वैष्णवत्व की शक्ति का अनुमान कौन लगा सकता है?
 
"He is such a great man that by his grace he can even make meat-eaters (mlechchas) adopt Krishna devotion. Therefore, who can estimate the power of his Vaishnavism?"
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd