श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.7.18 
सर्व - शास्त्रे कृष्ण - भक्त्ये नाहि याँर सम ।
अतएव ‘अद्वैत - आचार्य’ ताँर नाम ॥18॥
 
 
अनुवाद
"सभी शास्त्रों के ज्ञान और भगवान कृष्ण की भक्ति में वे अद्वितीय हैं। इसलिए उन्हें अद्वैत आचार्य कहा जाता है।"
 
His knowledge of all the authoritative scriptures and his devotion to Lord Krishna are unparalleled. Therefore, he is called Advaita Acharya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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