श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  3.7.169 
निगूढ़ चैतन्य - लीला बुझिते कार शक्ति? ।
सेइ बुझे, गौरचन्द्रे याँर दृढ़ भक्ति ॥169॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाएँ अत्यंत गहन हैं। इन्हें कौन समझ सकता है? केवल वही व्यक्ति इन लीलाओं को समझ सकता है जिसकी उनके चरणकमलों में दृढ़ एवं गहन भक्ति हो।
 
The pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu are profound. Who can understand them? Only one who has firm and unwavering devotion to His lotus feet can understand them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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