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श्लोक 3.7.163  |
पण्डितेर भाव - मुद्रा कहन ना याय ।
‘गदाधर - प्राण - नाथ’ नाम हैल याय ॥163॥ |
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| अनुवाद |
| गदाधर पंडित के गुणों और परमानंद प्रेम का वर्णन कोई नहीं कर सकता। इसलिए श्री चैतन्य महाप्रभु का एक अन्य नाम गदाधर-प्राणनाथ है, जिसका अर्थ है "गदाधर पंडित का जीवन और आत्मा।" |
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| No one can describe the expressions and love of Gadadhara Pandita. Therefore, another name for Sri Chaitanya Mahaprabhu is "Gadadhara Prananath," meaning "the life of Gadadhara Pandita." |
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