श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.7.16 
महाप्रभु कहे - “शुन, भट्ट महा - मति ।
मायावादी सन्यासी आमि, ना जानि कृष्ण - भक्ति” ॥16॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "मेरे प्रिय वल्लभ भट्ट, आप एक विद्वान हैं। कृपया मेरी बात सुनें। मैं मायावादी संप्रदाय का संन्यासी हूँ। इसलिए मुझे कृष्ण-भक्ति क्या है, यह जानने का कोई अवसर नहीं है।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, "O dear Vallabha Bhatta, you are a learned scholar. Please listen to me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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