श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  3.7.157 
पण्डित कहेन , - प्रभु स्वतन्त्र सर्वज्ञ - शिरोमणि ।
ताँर सने ‘हठ’ करि, - भाल नाहि मानि ॥157॥
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित ने कहा, "भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु पूर्णतः स्वतंत्र हैं। वे सर्वोच्च सर्वज्ञ व्यक्तित्व हैं। मुझे उनसे उनके समकक्ष बात करना अच्छा नहीं लगेगा।"
 
Gadadhara Pandita said, "Lord Sri Chaitanya Mahaprabhu is completely independent. He is the supreme omniscient being.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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