श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 155
 
 
श्लोक  3.7.155 
पथे पण्डितेरे स्वरूप कहेन वचन ।
“परीक्षिते प्रभु तोमारे कैला उपेक्षण” ॥155॥
 
 
अनुवाद
रास्ते में, स्वरूप दामोदर ने गदाधर पंडित से कहा, "श्री चैतन्य महाप्रभु आपकी परीक्षा लेना चाहते थे। इसलिए उन्होंने आपकी उपेक्षा की।"
 
On the way, Svarupa Damodara said to Gadadhara Pandit, "Sri Chaitanya Mahaprabhu wanted to test you. That is why he has ignored you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)