श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  3.7.152 
“तुमि ने आमार ठाञि कर आगमन ।
ताहातेइ प्रभु मोरे देन ओलाहन” ॥152॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्रिय वल्लभ भट्ट, श्री चैतन्य महाप्रभु आपका मेरे पास आना पसंद नहीं करते। इसलिए वे कभी-कभी मुझे डाँटने के लिए बोलते हैं।"
 
"O Vallabha Bhatta, Sri Chaitanya Mahaprabhu does not like your coming to my place. That is why sometimes he keeps asking to punish me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)