श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  3.7.151 
आमि - परतन्त्र, आमार प्रभु - गौरचन्द्र ।
ताँर आज्ञा विना आमि ना हइ ‘स्वतन्त्र’ ॥151॥
 
 
अनुवाद
"मैं पूर्णतः पराधीन हूँ। मेरे प्रभु गौरचंद्र, श्री चैतन्य महाप्रभु हैं। मैं उनकी आज्ञा के बिना स्वतंत्र रूप से कुछ भी नहीं कर सकता।
 
"I am completely dependent. My Lord is Gaurachandra Sri Chaitanya Mahaprabhu. I cannot do anything independently without His permission."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)