श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  3.7.149 
पण्डितेर सने तार मन फि रि’ गेल ।
किशोर - गोपाल - उपासनाय मन दिल ॥149॥
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित की संगति में उनका मन परिवर्तित हो गया और उन्होंने एक युवा बालक के रूप में अपना मन किशोर-गोपाल, कृष्ण की पूजा में समर्पित कर दिया।
 
His mind changed due to the association of Gadhdhar Pandit and he dedicated his mind to the worship of Kishore Gopal.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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