श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  3.7.147 
पूर्वे येन कृष्ण यदि परिहास कैल ।
शुनि’ रुक्मिणीर मने त्रास उपजिल ॥147॥
 
 
अनुवाद
इससे पहले, कृष्ण-लीला में, जब भगवान कृष्ण ने रुक्मिणीदेवी के साथ मजाक किया था, तो उन्होंने उनके शब्दों को गंभीरता से लिया, और उनके मन में भय जाग उठा।
 
Earlier, in Krishna Leela, when Lord Krishna joked with Rukmini Devi, she took his words seriously, which created fear in her mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)