श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  3.7.138 
भट्ट कहे , - “यदि मोरे हइला प्रसन्न ।
एक - दिन पुनः मोर मान’ निमन्त्रण” ॥138॥
 
 
अनुवाद
वल्लभ भट्टाचार्य ने श्री चैतन्य महाप्रभु से अनुरोध किया, “यदि आप वास्तव में मुझ पर प्रसन्न हैं, तो कृपया एक बार फिर मेरा निमंत्रण स्वीकार करें।”
 
Vallabha Bhatta Acharya prayed to Sri Chaitanya Mahaprabhu, “If you are really pleased with me, please accept my invitation once again.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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