श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  3.7.137 
“अपराध छाड़ि’ कर कृष्ण - सङ्कीर्तन ।
अचिरात् पाबे तबे कृष्णेर चरण” ॥137॥
 
 
अनुवाद
"अपने अपराधों को त्यागकर, हरे कृष्ण महामंत्र, भगवान के पवित्र नामों का जप करो। तब शीघ्र ही तुम कृष्ण के चरणकमलों की शरण प्राप्त करोगे।"
 
"Give up your sins and chant the Hare Krishna mantra. Then you will quickly find refuge in Krishna's lotus feet."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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