श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  3.7.131 
प्रभु कहे “तुमि ‘पण्डि त’ ‘महा - भागव त’ ।
दुइ - गुण याहाँ, ताहाँ नाहि गर्व - पर्वत ॥131॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "आप एक महान विद्वान और एक महान भक्त दोनों हैं। जहाँ ऐसे दो गुण हों, वहाँ मिथ्या अभिमान का पर्वत भी नहीं हो सकता।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "You are a great scholar and a great devotee. Wherever these two qualities exist, the mountain of false pride cannot exist."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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