श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  3.7.129 
तोमार कृपा - अञ्जने एबे गर्व - आन्ध्य गेल ।
तुमि एत कृपा कैला, - एबे ‘ज्ञान’ हैल ॥129॥
 
 
अनुवाद
"मेरे प्यारे प्रभु, आपने अपनी दया का मरहम मेरी आँखों पर मलकर मेरे झूठे अभिमान के अंधेपन को दूर कर दिया है। आपने मुझ पर इतनी दया की है कि अब मेरा अज्ञान दूर हो गया है।
 
"O Lord, you have applied the collyrium of your grace to my eyes and dispelled the blindness of my false pride. You have shown me such mercy that my ignorance is now gone."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd