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अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट
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श्लोक 126
श्लोक
3.7.126
“आमि अज्ञ जीव , - अज्ञोचित कर्म कैलुँ ।
तोमार आगे मूर्ख आमि पाण्डित्य प्रकाशिलुँ” ॥126॥
अनुवाद
वल्लभ भट्ट ने स्वीकार किया, "मैं महान मूर्ख हूँ, और वास्तव में मैंने आपको अपनी विद्या दिखाने का प्रयास करके मूर्खता का ही कार्य किया है।
Vallabha Bhatta admitted, “I am a great fool and have undoubtedly behaved like a fool by trying to display my erudition before you.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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