श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.7.108 
“अतएव नाम लय, नामेर ‘फल’ पाय ।
नामेर फले कृष्ण - पदे ‘प्रेम’ उपजाय” ॥108॥
 
 
अनुवाद
"इस धार्मिक सिद्धांत का पालन करते हुए, भगवान कृष्ण का शुद्ध भक्त सदैव पवित्र नाम का जप करता है। इसके परिणामस्वरूप, उसे कृष्ण के प्रति परमानंद प्रेम का फल प्राप्त होता है।"
 
"Following this religious principle, a pure devotee of Krishna always chants His holy name. As a result, he receives the fruit of love for Krishna."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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