| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 7: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं वल्लभ भट्ट की भेंट » श्लोक 104 |
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| | | | श्लोक 3.7.104  | “पति - व्रता ह ञा पतिर नाम नाहि लय ।
तोमरा कृष्णा - नाम लह, - कोन् धर्म हय?” ॥104॥ | | | | | | | अनुवाद | | "पतिपरायण पतिव्रता स्त्री का कर्तव्य है कि वह अपने पति का नाम न ले, परन्तु तुम सब लोग कृष्ण का नाम जपो। इसे धार्मिक सिद्धांत कैसे कहा जा सकता है?" | | | | "It is the duty of a devoted wife not to mention her husband's name, but you all chant Krishna's name. How can this be called religion?" | | ✨ ai-generated | | |
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