श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  3.6.98 
माला - चन्दन - ताम्बूल शेष ये आछिल ।
श्री - हस्ते प्रभु ताहा सबाकारे बाँटि’ दिल ॥98॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद प्रभु ने अपने हाथों से सभी भक्तों को जो भी फूल मालाएं, चंदन का गूदा और सुपारी बची थी, वितरित की।
 
Nityananda Prabhu distributed the remaining garlands, sandalwood paste and betel leaves among all the devotees with his own hands.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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