श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  3.6.88 
नित्यानन्द महाप्रभु कृपालु, उदार ।
रघुनाथेर भाग्ये एत कैला अङ्गीकार ॥88॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु और भगवान नित्यानंद प्रभु अत्यंत दयालु और उदार हैं। यह रघुनाथदास का सौभाग्य था कि उन्होंने ये सभी व्यवहार स्वीकार कर लिए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu and Nityananda Prabhu are extremely kind and generous. It was Raghunathdas's good fortune that he accepted all these treats.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)