श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.6.87 
‘हरि’ ‘हरि’ बलि’ वैष्णव करये भोजन ।
पुलिन - भोजन सबार हइल स्मरण ॥87॥
 
 
अनुवाद
जब सभी वैष्णव पवित्र नाम "हरि, हरि" का जप करते हुए भोजन कर रहे थे, तो उन्हें याद आया कि कैसे कृष्ण और बलराम ने अपने साथी ग्वालबालों के साथ यमुना के तट पर भोजन किया था।
 
When all the Vaishnavas were eating their food while chanting “Hari, Hari”, they remembered how Krishna and Balarama used to eat with their cowherd friends on the banks of Yamuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)