श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  3.6.86 
आज्ञा दिला , - “हरि ब लि’ करह भोज न”।
‘हरि’ ‘हरि’ - ध्वनि उठि’ भरिल भुवन ॥86॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद प्रभु ने आदेश दिया, "तुम सब लोग हरि के पवित्र नाम का जप करते हुए भोजन करो।" तुरन्त ही "हरि, हरि" पवित्र नाम गूँज उठा और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में गूंज उठा।
 
Sri Nityananda Prabhu commanded, “Everyone should eat while chanting Harinam.” The sound of “Hari, Hari” immediately filled the entire universe.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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