श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  3.6.74 
प्रभु कहे, - “ए - द्रव्य दिने करिये भोजन ।
रात्र्ये तोमार घरे प्रसाद करिमु भक्षण” ॥74॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद ने उत्तर दिया, "दिन में मुझे यह सारा भोजन यहीं खाने दीजिए, तथा रात्रि में मैं आपके घर पर भोजन करूंगा।"
 
Nityananda Prabhu replied, “Let me eat all this food during the day and at night I will eat at your house.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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