श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  3.6.72 
नि - सक्ड़ि नाना - मत प्रसाद आनिल ।
प्रभुरे आगे दिया भक्त - गणे बाँटि दिल ॥72॥
 
 
अनुवाद
वह घी में पकाए गए अनेक प्रकार के व्यंजन लाए और भगवान को अर्पित किए। यह प्रसाद उन्होंने सबसे पहले भगवान नित्यानंद के समक्ष रखा और फिर भक्तों में बाँट दिया।
 
They brought with them a variety of dishes cooked in ghee, which they presented to Nityananda Prabhu. This prasad was first placed before Nityananda Prabhu and then distributed among the devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)