श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.6.67 
एकेक जनारे दुइ दुइ होल्ना दिल ।
दधि - चिड़ा दुग्ध - चिड़ा, दुइते भिजाइल ॥67॥
 
 
अनुवाद
उनमें से प्रत्येक को दो मिट्टी के बर्तन दिए गए - एक में दही में भिगोए हुए चावल थे और दूसरे में गाढ़े दूध में भिगोए हुए चावल थे।
 
Each one was given two earthen pots – one containing puffed rice soaked in curd and the other containing puffed rice soaked in thick milk.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd