श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.6.46 
दण्डवत् हञा सेइ पड़िला कत - दूरे ।
सेवक कहे , - ‘रघुनाथ दण्डवत् करे’ ॥46॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथ दास ने दूर स्थान पर साष्टांग प्रणाम करके प्रणाम किया, और नित्यानंद प्रभु के सेवक ने बताया, "वहाँ रघुनाथ दास हैं, जो आपको प्रणाम कर रहे हैं।"
 
Raghunath Das bowed down like a stick at a distance and offered his respects and Nityananda Prabhu's servant pointed out, "Raghunath Das is offering his respects to you."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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