श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.6.42 
तबे रघुनाथ किछु विचारिला मने ।
नित्यानन्द - गोसाञि र पाश चलिला आर दिने ॥42॥
 
 
अनुवाद
तब रघुनाथदास ने मन में कुछ सोचा और अगले दिन वे नित्यानंद गोसांई के पास गए।
 
Then Raghunath Das thought something in his mind and the next day he went to Nityananda Goswami.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)