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श्लोक 3.6.41  |
“चैतन्य - चन्द्रेर कृपा हाछे इँहारे ।
चैतन्य - चन्द्रेर ‘बातुल’ के राखिते पारे ?” ॥41॥ |
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| अनुवाद |
| "भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने उस पर अपनी पूर्ण कृपा की है। ऐसे पागल चैतन्यचंद्र को कौन घर में रख सकता है?" |
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| "Sri Chaitanya Mahaprabhu has showered his full grace on him. Who can keep Chaitanyachandra's madman at home?" |
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