श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.6.41 
“चैतन्य - चन्द्रेर कृपा हाछे इँहारे ।
चैतन्य - चन्द्रेर ‘बातुल’ के राखिते पारे ?” ॥41॥
 
 
अनुवाद
"भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने उस पर अपनी पूर्ण कृपा की है। ऐसे पागल चैतन्यचंद्र को कौन घर में रख सकता है?"
 
"Sri Chaitanya Mahaprabhu has showered his full grace on him. Who can keep Chaitanyachandra's madman at home?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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