श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 328
 
 
श्लोक  3.6.328 
एइ त कहि लुँ रघुनाथेर मिलन ।
इहा येइ शुने पाय चैतन्य - चरण ॥328॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने श्रीचैतन्य महाप्रभु से रघुनाथदास की भेंट का वर्णन किया है। जो कोई इस घटना को सुनता है, वह श्रीचैतन्य महाप्रभु के चरणकमलों को प्राप्त करता है।
 
Thus I have described Raghunatha Das's meeting with Sri Chaitanya Mahaprabhu. Whoever hears of this incident attains the lotus feet of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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