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श्लोक 3.6.311  |
वैराग्येर कथा ताँर अद्भुत - कथन ।
आजन्म ना दिल जिह्वाय रसेर स्पर्शन ॥311॥ |
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| अनुवाद |
| उनके त्याग के विषय अद्भुत हैं। उन्होंने जीवन भर अपनी जीभ को कभी भी इन्द्रिय-तृप्ति का अवसर नहीं दिया। |
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| The stories of his renunciation are remarkable. He never allowed his tongue to be satisfied throughout his life. |
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