साढ़े सात प्रहर याय कीर्तन - स्मरणे ।
आहार - निद्रा चारि दण्ड सेह नहे कोन दिने ॥310॥
अनुवाद
रघुनाथदास हर चौबीस घंटे में से बाईस घंटे से ज़्यादा हरे कृष्ण महामंत्र का जाप और भगवान के चरण-कमलों का स्मरण करते हुए बिताते थे। वे डेढ़ घंटे से भी कम समय तक खाते-पीते और सोते थे, और कुछ दिनों में तो यह भी असंभव था।
Raghunatha Dasa spent more than twenty-two hours of every twenty-four hours chanting the Hare Krishna mantra and remembering the Lord's lotus feet. He spent less than an hour and a half eating and sleeping, and on some days even that was impossible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥