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श्लोक 3.6.303  |
एइ - मत कत दिन करेन पूजन ।
तबे स्वरूप - गोसाञि ताँरे कहिला वचन ॥303॥ |
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| अनुवाद |
| जब रघुनाथदास ने कुछ समय तक गोवर्धन-शिला की पूजा की, तो एक दिन स्वरूप दामोदर ने उनसे इस प्रकार कहा। |
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| When Raghunath Das had worshipped the Govardhan Shila for a few days, one day Swarup Damodar said to him thus. |
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