श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 290
 
 
श्लोक  3.6.290 
दुइ अपूर्व - वस्तु पाञा प्रभु तुष्ट हैला ।
स्मरणेर काले गले परे गुञ्जा - माला ॥290॥
 
 
अनुवाद
इन दो दुर्लभ वस्तुओं को पाकर श्री चैतन्य महाप्रभु अत्यंत प्रसन्न हुए। जप करते हुए उन्होंने माला अपने गले में डाल ली।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu was extremely happy to have these two unusual objects. He would wear the beads around his neck while chanting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)