श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.6.29 
एत शुनि’ सेइ म्लेच्छेर मन आर्द्र हैन ।
दाड़ि वा हि’ अश्रु पड़े, काँदिते लागिल ॥29॥
 
 
अनुवाद
जब मुसलमान ने रघुनाथदास की मनमोहक आवाज़ सुनी, तो उसका दिल पिघल गया। वह रोने लगा और उसकी दाढ़ी से आँसू बहने लगे।
 
Hearing Raghunath Das's pleading words, the Muslim's heart melted. He began to cry, and his tears rolled down his beard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)