श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 289
 
 
श्लोक  3.6.289 
पार्श्वे गाँथा गुञ्जा - माला, गोवर्धन - शिला ।
दुइ वस्तु महाप्रभुर आगे आनि’ दिला ॥289॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने श्री चैतन्य महाप्रभु को ये दो वस्तुएं भेंट कीं - शंखों की माला और गोवर्धन पर्वत से प्राप्त पत्थर।
 
He gave both those things – the garland of conches and the rock from Govardhan mountain – to Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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