श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 282
 
 
श्लोक  3.6.282 
गोविन्द - पाश शुनि’ प्रभु पुछेन स्वरूपेरे ।
‘रघु भिक्षा लागि’ ठाड़ केने नहे सिंह - द्वारे’? ॥282॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने गोविंद से यह समाचार सुना, तो उन्होंने स्वरूप दामोदर से पूछा, "रघुनाथदास अब सिंहद्वार पर भिक्षा मांगने क्यों नहीं आते?"
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu heard this news from Govinda, he asked Swarupa Damodara, “Why doesn’t Raghunatha Dasa stand at the Singhdwara to beg for alms now?”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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