| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट » श्लोक 273 |
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| | | | श्लोक 3.6.273  | ‘रघु केने आमाय निमन्त्रण छाड़ि’ दिल?’ ।
स्वरूप कहे , - “मने किछु विचार करिल” ॥273॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान ने पूछा, “रघुनाथ दास ने मुझे आमंत्रित करना क्यों बंद कर दिया है?” स्वरूप दामोदर ने उत्तर दिया, “उन्होंने अपने मन में कुछ पुनर्विचार किया होगा।” स्वरूप दामोदर ने उत्तर दिया, “उन्होंने अपने मन में कुछ पुनर्विचार किया होगा। | | | | Mahaprabhu asked, “Why has Raghunatha Dasa stopped inviting me?” Svarupa Damodara replied, “He must be thinking of something again.” | | ✨ ai-generated | | |
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