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श्लोक 3.6.271  |
एइ - मत निमन्त्रण वर्ष दुइ कैला ।
पाछे रघुनाथ निमन्त्रण छाड़ि’ दिला ॥271॥ |
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| अनुवाद |
| रघुनाथदास ने दो वर्षों तक श्री चैतन्य महाप्रभु को इसी प्रकार आमंत्रित करना जारी रखा, किन्तु दूसरे वर्ष के अन्त में उन्होंने ऐसा करना बंद कर दिया। |
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| In this way Raghunatha Dasa continued to invite Sri Chaitanya Mahaprabhu for two years, but at the end of the second year he stopped doing so. |
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