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श्लोक 3.6.267  |
सेइ विप्र भृत्य, चारि - शत मुद्रा लञा ।
नीलाचले रघुनाथे मिलिला आसिया ॥267॥ |
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| अनुवाद |
| सेवक और ब्राह्मण चार सौ सिक्के जगन्नाथ पुरी ले आये और वहाँ उनकी मुलाकात रघुनाथ दास से हुई। |
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| That servant and that Brahmin brought four hundred coins with them to Jagannathpuri and met Raghunath Das there. |
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