श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 259
 
 
श्लोक  3.6.259 
चारि - शत मुद्रा, दुइ भृत्य, एक ब्राह्मण ।
शिवानन्देर ठाञि पाठाइल तत - क्षण ॥259॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथदास के पिता ने तुरन्त चार सौ सिक्के, दो सेवक और एक ब्राह्मण शिवानन्द सेना के पास भेज दिये।
 
Raghunath Das's father immediately sent four hundred coins, two servants and a Brahmin to Shivananda Sen.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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