श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 6: श्री चैतन्य महाप्रभु तथा रघुनाथ दास गोस्वामी की भेंट  »  श्लोक 252
 
 
श्लोक  3.6.252 
स्वरूपेर स्थाने तारे करियाछेन समर्पण ।
प्रभुर भक्त - गणेर तेंहो हय प्राण - सम ॥252॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें स्वरूप दामोदर के अधीन कर दिया है। रघुनाथदास भगवान के सभी भक्तों के जीवन के समान हो गए हैं।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu placed him under the protection of Swarupa Damodara. Raghunatha Dasa has become the lifeblood of all Mahaprabhu's devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)